वर्धा में पहला दिन

5 जुलाई 2019 शुक्रवार का दिन था. सुबह के 8:30 बजे थे. हल्की बारिश थी स्टेशन के बाहर निकते इस मिट्टी में अपने पन का एहसास हुआ. गाँधी जी का भी इस मिट्टी से बहुत गहरा लगाव था. सुबह नास्ता किया एक सज्जन व्यक्ति ने मुझे महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्व्वविद्यालय वर्धा जाने का मार्ग बताया. मै ऑटो से निकल पड़ा जहा आज मेरा M.A जनसंचार परीक्षा और साक्षात्कार था. रास्ते में गाँधी हिल में जाकर पूज्यनीय बापू के दर्शन किया कुछ एक दो फोटो भी खींची उसके बाद परीक्षा हाल समता भवन की तरफ चल पड़ा. परीक्षा मैं पास हुआ. आज मैं उस पहले दिन की वर्धा यात्रा को याद करके बहुत खुश हो जाता हों..

एक जिंदगी ऐसी भी… अंक 1

ये तस्वीर उस वक्त मैंने ली थी. जब मैं अपने विश्वविद्यालय की तरफ निकल रहा था रास्ते में   बैठा ये व्यक्ति मानो कह रहा हो कि ये दुनिया में रोने वालो देखो मैं इस हालत में भी खुश हूँ. तुम्हारे पास सब कुछ हैं फिर भी तू रो रहा हैं.    ये तस्वीर मानो कह रहा हो तू सिख मुझ से कुछ क्योंकि मैं भी इस दुनिया का एक हिस्सा हूँ.. मेरे लिए भी ये धरती आसमान एक है.                                                         कुछ ना बोलता ये तस्वीर मानो सब कुछ कह गया.. हालात कैसे भी हो आपकी खुशी ही सच्चे मायने में आपकी सफलता है.